“गोरा (Hindi)” पहचान, राष्ट्रवाद और मानवता पर आधारित एक कालजयी उपन्यास है, जो समाज की गहरी सच्चाइयों से रूबरू कराता है।
यह पुस्तक सिखाती है कि विचार ही असली पहचान बनाते हैं। 📖✨

“गोरा (Hindi)” पहचान, राष्ट्रवाद और मानवता पर आधारित एक कालजयी उपन्यास है, जो समाज की गहरी सच्चाइयों से रूबरू कराता है।
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क्या पहचान जन्म से तय होती है,
या विचारों और कर्मों से बनती है?
विश्वप्रसिद्ध साहित्यकार
Rabindranath Tagore
की महान कृति “गोरा”
भारतीय समाज, राष्ट्रवाद, धर्म और जाति जैसे
गंभीर विषयों पर आधारित
एक कालजयी और विचार बदल देने वाला उपन्यास है।
यह उपन्यास गोरा नामक एक ऐसे युवक की कहानी है
जो अपने आदर्शों, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक मान्यताओं के बीच
सत्य, आत्मबोध और मानवता की खोज करता है।
इस पुस्तक में आप पाएँगे—
भारतीय समाज की गहरी सामाजिक संरचना
धर्म, जाति और राष्ट्रवाद पर साहसी प्रश्न
आत्मसंघर्ष और वैचारिक परिवर्तन की यात्रा
मानवीय मूल्यों की सशक्त प्रस्तुति
साहित्य, दर्शन और समाज का अद्भुत संगम
✔ हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर
✔ गहरी सोच और भावनात्मक प्रभाव
✔ आज के समय में भी उतनी ही प्रासंगिक
✔ विद्यार्थियों, साहित्य प्रेमियों और विचारकों के लिए अनिवार्य
✔ पढ़ते-पढ़ते आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करने वाली रचना
🌟 यह किताब उनके लिए है जो
कहानी नहीं,
समाज और स्वयं को समझना चाहते हैं।
👉 आज ही पढ़ें और महसूस करें—
विचारों की वह शक्ति
जो इंसान को भीतर से बदल देती है।
✨ *क्योंकि सच्चा साहित्य
सिर्फ मनोरंजन नहीं,
चेतना का जागरण होता है।
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