📘 पापमान (Hindi) – निखिल सचान
🧠 समाज • व्यंग्य • यथार्थ
“पापमान”
लोकप्रिय लेखक
Nikhil Sachan
की एक तीखी और समकालीन कृति है,
जो आधुनिक समाज की विसंगतियों और नैतिक उलझनों पर व्यंग्यात्मक प्रहार करती है।
यह पुस्तक सवाल उठाती है—
क्या सच में पाप और पुण्य का मापदंड एक जैसा है?
या समाज ने अपने हिसाब से नई परिभाषाएँ गढ़ ली हैं?
सरल, बोलचाल की भाषा और गहरे व्यंग्य के साथ
यह कृति पाठकों को हँसाते हुए सोचने पर मजबूर करती है।
✨ इस पुस्तक में क्या मिलेगा?
✔ समकालीन समाज पर तीखा व्यंग्य
✔ नैतिकता और आडंबर पर प्रश्न
✔ युवाओं से जुड़ा यथार्थ चित्रण
✔ हल्की-फुल्की लेकिन गहरी शैली
✔ सोच बदलने वाली दृष्टि
💡 यह पुस्तक सिखाती है—
सच अक्सर असहज होता है,
लेकिन वही बदलाव की शुरुआत करता है।
👉 आज ही पढ़ें और
व्यंग्य और यथार्थ की इस अनोखी यात्रा का हिस्सा बनें। 📚✨







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