📘 जूठन–2 (Hindi)
✍️ संघर्ष • चेतना • दलित आत्मकथा की सशक्त आवाज़
“जूठन–2” प्रख्यात दलित लेखक Om Prakash Valmiki की चर्चित आत्मकथा
Joothan-2 का दूसरा भाग है,
जो भारतीय समाज की कठोर सच्चाइयों,
जातिगत भेदभाव और मानवीय संघर्षों को
बेहद ईमानदारी और साहस के साथ सामने रखता है।
यह पुस्तक लेखक के जीवन के उन अनुभवों को उजागर करती है
जहाँ शिक्षा, साहित्य और समाज के भीतर भी
भेदभाव और उपेक्षा की दीवारें मौजूद थीं।
“जूठन–2” केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं,
बल्कि उस पूरे वर्ग की आवाज़ है
जो सदियों से दबाया गया।
✨ इस पुस्तक में क्या मिलेगा?
✔ दलित जीवन की अनकही और कड़वी सच्चाइयाँ
✔ साहित्य और समाज में मौजूद जातिगत भेदभाव
✔ आत्मसम्मान, संघर्ष और चेतना का विकास
✔ ईमानदार आत्मकथात्मक लेखन
✔ छात्रों, शोधार्थियों और समाज-चिंतकों के लिए अनिवार्य पाठ
💡 यह पुस्तक सहानुभूति नहीं माँगती—
यह सोच बदलने की माँग करती है।
👉 आज ही पढ़ें और
भारतीय समाज की उस सच्चाई को समझें
जो अक्सर किताबों से बाहर रख दी जाती है।







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